Skip to main content

दैनिक जागरण (राष्ट्रिय संस्करण ) में प्रकाशित



दैनिक जागरण (राष्ट्रिय संस्करण ) में प्रकाशित 



Comments

Popular posts from this blog

महाभियोग पर कांग्रेस का महाप्रलाप

सात विपक्षी दलों द्वारा मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ़ दिए गए महाभियोग नोटिस को उपराष्ट्रपति ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि मुख्य न्यायधीश के ऊपर लगाए गए आरोप निराधार और कल्पना पर आधारित है. उपराष्ट्रपति की यह तल्ख़ टिप्पणी यह बताने के लिए काफ़ी है कि कांग्रेस ने  किस तरह से अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए महाभियोग जैसे अति गंभीर विषय पर अगम्भीरता दिखाई है. महाभियोग को अस्वीकार करने की 22 वजहें उपराष्ट्रपति ने बताई हैं. दस पेज के इस फ़ैसले में उपराष्ट्रपति ने कुछ महत्वपूर्ण तर्क भी दिए हैं. पहला, सभी पांचो आरोपों पर गौर करने के बाद ये पाया गया कि यह सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला है ऐसे में महाभियोग के लिए यह आरोप स्वीकार नहीं किये जायेंगे. दूसरा, रोस्टर बंटवारा भी मुख्य न्यायधीश का अधिकार है और वह मास्टर ऑफ़ रोस्टर होते हैं. इस तरह के आरोपों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ठेस पहुंचती है. तीसरा, इस तरह के प्रस्ताव के लिए एक संसदीय परंपरा है. राज्यसभा के सदस्यों की हैंडबुक के पैराग्राफ 2.2 में इसका उल्लेख है, जिसके तहत इस तरह के नोटिस को पब्लिक करने की अनुमति नहीं है, किन्त…

दुष्प्रचार की डगमगाती नैया के बीच गतिशील संघ !

यह एक सामान्य सत्य है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को लेकर तमाम प्रकार की भ्रांतियां एवं दुष्प्रचार लंबे समय से देश में चलता रहा है.कांग्रेस एवं मीडिया से जुड़े बुद्दिजीवियों का एक धड़ा संघ को एक साम्प्रदायिक एवं राष्ट्र विरोधी संगठन जैसे अफवाहों को हवा देने की जिम्मेदारी अपने कंधो पर ले रखी है.किंतु वर्तमान समय में इनका   हर दावं विफ़ल साबित हो रहा है,जिससे तंग आकर इस कबीले के लोगों ने नया ढंग ईजाद किया है.वह है संघ से जुड़े पदाधिकारियों के बयान को अपनी सुविधा और अपने वैचारिक हितों की पूर्ति के मद्देनजर दिखाना.ताज़ा मामला संघ प्रमुख मोहन भागवत के बिहार के मुजफ्फरपुर में रविवार को दिए भाषण का है.संघ प्रमुख ने स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि “हमारा मिलिट्री संगठन नहीं है मिलिट्री जैसी डिसिप्लिन हमारी है और अगर देश को जरूरत पड़े और देश का संविधान,कानून कहे तो, सेना तैयार करने में छह –सात महीने लग जायेंगे,संघ के स्वयंसेवक को लेंगे तो तीन दिन में तैयार हो जाएगा.यह हमारी क्षमता है लेकिन, हम मिलिट्री संगठन नहीं है पैरामिलिट्री भी नहीं हैं हम तो पारिवारिक संगठन हैं” मोहन भागवत के इस संतुलित…

कर्नाटक में स्थायी सरकार जरूरी

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम सबके सामने है.किसी भी दल को वहाँ की जनता ने स्पष्ट जनादेश नहीं दिया .लेकिन, बीजेपी लगभग बहुमत के आकड़े चुमते –चुमते रह गई और सबसे बड़े दल के रूप में ही भाजपा को संतोष करना पड़ा है. कौन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा ? इस खंडित जनादेश के मायने क्या है ? क्या कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को खारिज़ कर दिया ? ऐसे बहुतेरे सवाल इस खंडित जनादेश के आईने में खड़े हो थे. सरकार बनाने के लिए तमाम प्रकार की जद्दोजहद कांग्रेस और जेडीएस ने किया किन्तु कर्नाटक की जनता ने बीजेपी को जनादेश दिया था इसलिए राज्यपाल ने संविधान सम्मत निर्णय लेते हुए बी.एस यदुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता भेजा. राज्यपाल के निर्णय से बौखलाई कांग्रेस आधी रात को सुप्रीम कोर्ट की शरण में गई लेकिन, उसे वहां भी मुंह की खानी पड़ी. खैर,बृहस्पतिवार की सुबह यदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.राज्यपाल के निर्देशानुसार पन्द्रह दिन के भीतर उन्हें  विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा,फिलहाल अगर कर्नाटक की राजनीति को समझें तो बीजेपी के लिए यह बहुत कठिन नहीं होगा.क्योंकि जेडीएस और कांग्रेस के बीच हुए इस अनैतिक गठबन्…