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कर्नाटक में स्थायी सरकार जरूरी

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के परिणाम सबके सामने है.किसी भी दल को वहाँ की जनता ने स्पष्ट जनादेश नहीं दिया .लेकिन, बीजेपी लगभग बहुमत के आकड़े चुमते –चुमते रह गई और सबसे बड़े दल के रूप में ही भाजपा को संतोष करना पड़ा है. कौन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा ? इस खंडित जनादेश के मायने क्या है ? क्या कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को खारिज़ कर दिया ? ऐसे बहुतेरे सवाल इस खंडित जनादेश के आईने में खड़े हो थे. सरकार बनाने के लिए तमाम प्रकार की जद्दोजहद कांग्रेस और जेडीएस ने किया किन्तु कर्नाटक की जनता ने बीजेपी को जनादेश दिया था इसलिए राज्यपाल ने संविधान सम्मत निर्णय लेते हुए बी.एस यदुरप्पा को सरकार बनाने का न्यौता भेजा. राज्यपाल के निर्णय से बौखलाई कांग्रेस आधी रात को सुप्रीम कोर्ट की शरण में गई लेकिन, उसे वहां भी मुंह की खानी पड़ी. खैर,बृहस्पतिवार की सुबह यदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.राज्यपाल के निर्देशानुसार पन्द्रह दिन के भीतर उन्हें  विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा,फिलहाल अगर कर्नाटक की राजनीति को समझें तो बीजेपी के लिए यह बहुत कठिन नहीं होगा.क्योंकि जेडीएस और कांग्रेस के बीच हुए इस अनैतिक ग...

महाभियोग पर कांग्रेस का महाप्रलाप

सात विपक्षी दलों द्वारा मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ़ दिए गए महाभियोग नोटिस को उपराष्ट्रपति ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि मुख्य न्यायधीश के ऊपर लगाए गए आरोप निराधार और कल्पना पर आधारित है. उपराष्ट्रपति की यह तल्ख़ टिप्पणी यह बताने के लिए काफ़ी है कि कांग्रेस ने  किस तरह से अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए महाभियोग जैसे अति गंभीर विषय पर अगम्भीरता दिखाई है. महाभियोग को अस्वीकार करने की 22 वजहें उपराष्ट्रपति ने बताई हैं. दस पेज के इस फ़ैसले में उपराष्ट्रपति ने कुछ महत्वपूर्ण तर्क भी दिए हैं. पहला, सभी पांचो आरोपों पर गौर करने के बाद ये पाया गया कि यह सुप्रीम कोर्ट का अंदरूनी मामला है ऐसे में महाभियोग के लिए यह आरोप स्वीकार नहीं किये जायेंगे. दूसरा, रोस्टर बंटवारा भी मुख्य न्यायधीश का अधिकार है और वह मास्टर ऑफ़ रोस्टर होते हैं. इस तरह के आरोपों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को ठेस पहुंचती है. तीसरा, इस तरह के प्रस्ताव के लिए एक संसदीय परंपरा है. राज्यसभा के सदस्यों की हैंडबुक के पैराग्राफ 2.2 में इसका उल्लेख है, जिसके तहत इस तरह के नोटिस को पब्लिक करने की अनुमति नहीं ...

कर्नाटक चुनाव : सियासी वर्चस्व की लड़ाई

दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों में से एक कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव की घोषणा चुनाव आयोग ने कर दी है.प्रदेश की 224 सीटों पर एक ही चरण में 12 मई को मतदान संपन्न होंगे और 15 मई को नतीजे सामने आएंगे. गौरतलब है कि चुनाव आयोग मतदान की तारीखों का एलान से पहले ही प्रदेश का राजनीतिक पारा अपने उफान पर है.भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के दौरे से राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ी हुई हैं.चुनावी बिगुल के साथ यह तय हो गया कि प्रदेश का सियासी पारा अब शांत होने वाला नहीं है.पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी दो दिन के कर्नाटक दौरे पर गये,उसके तुरंत बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कर्नाटक दौरा इस बात की तरफ स्पष्ट संकेत दे रहा है कि कर्नाटक चुनाव को दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए सियासी वर्चस्व की लड़ाई है.कांग्रेस के लिए कर्नाटक का चुनाव न केवल बेहद महत्वपूर्ण है.बल्कि चुनाव के परिणाम भविष्य की राजनीति में कांग्रेस के आस्तित्व को भी रेखांकित करेंगे.कर्नाटक आखिरी बड़ा राज्य बचा है जहाँ कांग्रेस सत्ता में बनी हुई है.ऐसे में कांग्रेस किसी भी स्थिति में यह नहीं चाहेगी कि कर्नाटक की सत...

खुद ही हास्य की पात्र बन गई कांग्रेस !

  इराक़ के मोसुल में जून 2014 से लापता 39 भारतीयों के जिंदा वापस लौटने की धुंधली उम्मीदें भी गत दिनों दफ़न हो गई हैं.जिसको लेकर कांग्रेस ने जिस ओछी राजनीति का परिचय सदन के अंदर और सदन के बाहर दिया देश ने उसको देखा.इसके बाद कांग्रेस की जम कर फ़जीहत भी हुई है.कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल पर लोगो का मत जानने के लिए एक सवाल पूछा.सवाल कुछ इस तरह से था इराक़ में मारे गये 39 भारतीयों की मौत विदेश मंत्री की बड़ी असफ़लता है ? .इस सवाल का जवाब लगभग 33,789 लोगों ने दिया जिसमें 76% लोगों ने कांग्रेस के इस सवाल को सिरे से खारिज़ कर किया.इस पोल के कारण कांग्रेस की खूब भद्द ही नहीं पिटी बल्कि जनता ने कांग्रेस की  शर्मनाक राजनीति को तत्काल आईना दिखाया है. बहरहाल,विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कुछ दिनों पहले यह दुखद जानकारी देते हुए बताया कि लापता हुए ये सभी भारतीय आइएस के आतंकियों के द्वारा मारें जा चुके हैं.इनके शवों के अवशेष मोसुल के बदूश स्थित गावं में मिला है.समूचे देश के लिए यह एक दुखद और पीड़ादायक घटना है.गौरतलब है कि  भारत सरकार इराक़ के सहयोग से लंबे समय से इस जद्दोजहद में लगी हुई थी क...

दुष्प्रचार की डगमगाती नैया के बीच गतिशील संघ !

यह एक सामान्य सत्य है कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को लेकर तमाम प्रकार की भ्रांतियां एवं दुष्प्रचार लंबे समय से देश में चलता रहा है.कांग्रेस एवं मीडिया से जुड़े बुद्दिजीवियों का एक धड़ा संघ को एक साम्प्रदायिक एवं राष्ट्र विरोधी संगठन जैसे अफवाहों को हवा देने की जिम्मेदारी अपने कंधो पर ले रखी है.किंतु वर्तमान समय में इनका   हर दावं विफ़ल साबित हो रहा है,जिससे तंग आकर इस कबीले के लोगों ने नया ढंग ईजाद किया है.वह है संघ से जुड़े पदाधिकारियों के बयान को अपनी सुविधा और अपने वैचारिक हितों की पूर्ति के मद्देनजर दिखाना.ताज़ा मामला संघ प्रमुख मोहन भागवत के बिहार के मुजफ्फरपुर में रविवार को दिए भाषण का है.संघ प्रमुख ने स्वयं सेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि “हमारा मिलिट्री संगठन नहीं है मिलिट्री जैसी डिसिप्लिन हमारी है और अगर देश को जरूरत पड़े और देश का संविधान,कानून कहे तो, सेना तैयार करने में छह –सात महीने लग जायेंगे,संघ के स्वयंसेवक को लेंगे तो तीन दिन में तैयार हो जाएगा.यह हमारी क्षमता है लेकिन, हम मिलिट्री संगठन नहीं है पैरामिलिट्री भी नहीं हैं हम तो पारिवारिक संगठन हैं” मोहन भागवत के ...

कृषि और ग्रामीण विकास के लिए जरूरी बजट

 आर्थिक समीक्षा आने के पश्चात् यह अंदाज़ा हो गया था कि वित्त मंत्री अरूण जेटली आगामी बजट को राजनीतिक महत्वाकांक्षा से परे एक ठोस बज़ट प्रस्तुत करेंगे.जिसमें ग्रामीण, कृषि और रोजगार पर ज्यादा फोकस रहेगा.हुआ भी ऐसा ही ,वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 2018-19 के आम बजट में ग्रामीण विकास, ग्रामीण रोजगार और स्वास्थ्य को लेकर कई अहम योजनाओं की घोषणाएं की. जो आगमी वर्षों में किसान और ग्रामीण जनता के जीवन में सकरात्मक बदलाव ला सकते हैं. जाहिर है कि जब भी आम बजट आता है सरकार अपने बजट को सराहती है, प्रसंशा करती है वहीँ विपक्ष बजट को लेकर आलोचनात्मक प्रतिक्रिया देता है किन्तु, आम जनता ,गावं की जनता इस आस में जरूर रहती है इस बजट में उसके लिए क्या खास है ? अमूमन यह देखने को मिलता है बजट को सत्ता पक्ष समावेशी और समग्र विकास वाला बजट ,ग्रामीण और कृषि केन्द्रित बजट कहते हैं लेकिन,  यह पहली बार हो रहा है कि 2018-2019 के बजट को प्रधानमंत्री नए भारत का बजट कहा है. गौरतलब है कि 2022 में भारत अपनी स्वतंत्रता के 75वीं वर्षगाठ मनाएगा,इस आज़ादी के साल को प्रधानमंत्री ने नए भारत की परिकल्पना की है. जिसमें...

आतंकी संगठनों पर कार्यवाही करे पाक

जब समूचा विश्व नए साल के जश्न में डूबा हुआ था उसी वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाते हुए झूठा और कपटी देश बताते हुए अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए जा रहे वित्तीय सहायता के उपयोग और अपने ही देश की नीति पर गंभीर प्रश्न खड़ा किये .अमेरिका के राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तान को जो मदद आतंक के खात्मे के लिए प्रदान की जा रही थी उसे पाक आतंकियों की मदद में लगा रहा है.गौरतलब है कि अमेरिका पाकिस्तान को  विगत पंद्रह साल में 33 अरब डॉलर की भारी रकम इसलिए देता रहा ताकि पाकिस्तान इससे आतंकियों से निपट सके.किन्तु पाकिस्तान इस धन का उपयोग शुरू से ही आतंकियों  की नस्ल को तैयार करने में,उन्हें आधुनिक हथियारों से लैस करने में लगाता रहा.जिससे कुकुरमुत्ते की भांति आतंकी संगठन तैयार हो गए और पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों का सबसे बड़ा पनाहगाह देश बन गया.इसके बाद से वाइट हाउस ने कार्यवाही करते हुए 1626 करोड़ रूपये की सैन्य सहायता को रोक दिया है वर्तमान समय में आतंकियों को संरक्षण देने वाला देश बन चुका पाकिस्तान खुद इसके गिरफ़्त में है बावजूद इसके...