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फतवा,हिंसा और ध्वस्त कानून व्यवस्था पर खामोश ममता तानाशाही की ओर अग्रसर !

    आज बंगाल तथा बंगाल की मुख्यमंत्री दोनों चर्चा के केंद्र में हैं.   बंगाल, रक्तरंजित राजनीति, साम्प्रदायिक हिंसा तथा शाही इमाम द्वारा जारी फतवे के लिए चर्चा में है . तो वहीँ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मोदी विरोध के हट तथा भ्रष्ट नेताओं के बचाव के चलते लगातार सुर्ख़ियों में हैं. दरअसल, नोटबंदी का फैसला जैसे ही मोदी सरकार ने लिया तभी से ममता, मोदी पर पूरी तरह से बौखलाई हुई हैं. ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जब ममता मोदी पर व्यर्थ में निशाना न साधे. खैर, अभी नोटबंदी के सदमे से ममता उभर पाती इससे पहले ही सीबीआई ने रोजवैली चिटफंड के करोड़ो के घोटाले में तृणमूल के दो सांसदों को गिरफ्तार कर लिया. जैसे ही यह गिरफ्तारी हुई ममता पूरी तरह तिलमिला उठीं तथा जरूरत से ज्यादा उग्र प्रतिक्रिया देते हुए इस गिरफ्तारी को राजनीतिक बदला करार दिया. लेकिन, हकीकत यह है कि यह पूरी जाँच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही है और सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है. बावजूद इसके सांसदों की गिरफ्तारी के बाद तृणमूल के नेताओं ने जिस तरह उपद्रव मचा रखा है, वह अपनेआप में शर्मनाक कृत्य है. गिरफ्त...

यह चुनाव साख और नाक बचाने की लड़ाई है !

सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए चुनाव आयोग ने बुधवार को पांच राज्यों  में होने वाले विधानसभा चुनाव का शंखनाद कर दिया है.यूपी,पंजाब ,गोवा,उत्तराखंड तथा मणिपुर में होने जा रहे विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही सभी राजनीतिक दलों में हलचल तेज़ हो गई है.इन राज्यों में चुनाव परिणाम भविष्य के गर्भ में है लेकिन, यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि यह चुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए वर्चस्व की लड़ाई है. चार फरवरी से शुरू होने जा रहा यह चुनावी दंगल आठ मार्च तक चलेगा तथा ग्यारह मार्च को सभी राज्यों के नतीजे एक साथ आयेंगे.चार फरवरी को गोवा –पंजाब से चुनाव की शुरुआत होगी.ग्यारह फरवरी से सात चरण में यूपी विधानसभा के चुनाव संपन्न होंगे.वहीँ मणिपुर में पहले चरण का मतदान चार मार्च को और दूसरे चरण का का मतदान आठ मार्च को समाप्त होंगे तथा उत्तराखंड में पन्द्रह फरवरी को वोटिंग होगी.इन सभी राज्यों के चुनाव परिणाम निश्चित तौर पर भविष्य की राजनीति की दिशा व दशा तय करने वाले होंगे.गौरतलब है कि यह चुनाव राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ क्षेत्रीय दलों के लिए भी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा.केंद्र में सत्तारूढ़ दल बी...

‘वरदा’ चक्रवात को लेकर दिखी कुशल तैयारी

तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश में चक्रवात वरदा के आने से जनजीवन पूरी तरह से अस्त –व्यस्त हो गया है.मौसम विभाग ने इस बात की पहले ही जानकारी दी थी कि वरदा नाम का तूफान सोमवार को तमिलनाडु में प्रवेश करेगा . मौसम विभाग की जानकारी के अनुसार तैयारी भी पूरी कर ली गई थी. गौरतलब है कि चक्रवात वरदा सोमवार की दोपहर दो से चार बजे के बीच में चेन्नई के उतरी तट से टकराया. उस समय उसका वेग काफी ज्यादा था किन्तु धीरे –धीरे यह तूफान कमजोर पड़ता गया. बावजूद इसके अभी तक लगभग सात लोग काल के गाल में समा चुके हैं, घर तबाह हो गये हैं, बिजली काट दी गई है, पेड़ उखड़ गये हैं, बिजली के खम्भे धाराशाई हो गये हैं तथा रेल, सड़क व वायु यातायात अवरुद्ध हो गया है. तमिलनाडु में आठ हजार तथा आंध्रप्रदेश में नौ हजार से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों में तूफान के अंदेशे के साथ ही पहुंचा दिया गया था. चेन्नई, तिरुवल्लुर, कांचीपुरम और विल्लीपुरम में वरदा का व्यापक असर देखने को मिला. मौसम विभाग ने इस तूफान की गति पहले 140 किलोमीटर प्रति घंटे से दर्ज की किन्तु कुछ देर बाद इसकी रफ्तार कम होती गई जो सौ किलोमीटर प्रति घंटा के आस –पास रही क...

संसद की प्रतिष्ठा को धूमिल करते सियासतदान

संसद  के शीतकालीन सत्र समाप्त होने में चंद दिन शेष बचे हैं और यह पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है. नोटबंदी को लेकर विपक्षी दल लोकतंत्र के मंदिर मे जो अराजकता का माहौल बनाए हुए हैं वह शर्मनाक है. गौरतलब है कि नोटबंदी एक ऐसा फैसला है जिसका प्रभाव देश के हर व्यक्ति पर पड़ा है और आमजनता कतार में खड़ी है. उसे तमाम प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. नोटबंदी के फैसले के बाद आमजनता के जहन में भी कई सवाल खड़े हुए हैं जिसके जवाब के लिए वह संसद की तरफ देख रही है. किन्तु हमारे द्वारा चुनकर भेजे गये प्रतिनिधि इन सवालों के जवाब तथा इस समस्या का हल निकालने की बजाय अपनी राजनीतिक शक्ति और झूठी प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ने में मशगूल हैं. ऐसे कठिन समय में और इतने गंभीर मुद्दे पर भी हमारे सियासतदान अपनी ओछी राजनीति से बाज़ नहीं आ रहे हैं. नोटबंदी के बाद जनता में अफरातफरी का जो महौल बना है उससे जनता को कैसे निकाला जाए, कैश को लेकर जो समस्याएँ आमजनता के समक्ष आ रही हैं, उस समस्या से निजात जनता को कैसे मिले? इसपर बात करने की बजाय हमारे राजनीतिक दल अपने अनुसार राजनीतिक रोटियां सेंक रहे ह...

बैकफूट पर पाकिस्तान

अमृतसर में आयोजित 7वें  हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन कई मायने में अहम रहा अफगानिस्तान के पुनर्गठन,सुरक्षा व आर्थिक विकास के साथ –साथ  आतंकवाद तथा नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने जैसे गंभीर विषय चर्चा के केंद्र में रहे सम्मेलन के एजेंडे में आतंकवाद का मुद्दा प्रमुख था.जाहिर है कि जिस मंच पर पाकिस्तान के प्रतिनिधि मौजूद हों और बात आतंकवाद को उखाड़ फेकने की हो वहां पाक प्रतिनिधि का असहज होना स्वाभाविक है.भारत के प्रधानमंत्री और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने आतंकवाद के मसले को पाक को कटघरे में खड़ा किया तो वहीँ इस सम्मेलन में संयुक्त रूप से आतंकवाद के खिलाफ तैयार घोषणा पत्र में लश्करे-ए- तैयबा और जैश –ए –मोहम्मद समेत कई आतंकी संगठनों को रेखांकित किया गया है.यह भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता है जाहिर है कि ये आतंकी संगठन पाकिस्तान द्वारा पोषक हैं तथा पाकिस्तान इनके सहयोग से भारत के साथ –साथ अफगानिस्तान में अशांति और हिंसा के लिए इनका इस्तेमाल करता रहता है. एक बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देता है और उसका इस्तेमाल भारत ,अफगानिस्तान जैसे देश में अस्थिरता उत्पन्न करने के लिए कर...

बैंक डिफाल्टरों पर सुप्रीमकोर्ट का रुख सही

         बैंक डिफाल्टरों का मुद्दा समय –समय संसद से सड़क तक चर्चा का विषय बना रहता है.चुकी बैंको पर एनपीए का बढ़ता दबाव देश की आर्थिक स्थिति को दीमक की तरह चाट रहा है बावजूद इसके हमारे बैंक खुद के पैसे वसूलने में असहाय दिख रहें है. सर्वोच्च न्यायालय भी इस विकराल समस्या पर अपनी नजर गढाये हुए है. न्यायपालिका लोन डिफाल्टर में मामले पर कई दफा सरकार आरबीआई समेत कई बैंको को आड़े हाथों लेता रहा है.वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि डिफाल्टरों के नाम खुलासा अब कोई बड़ा मसला नहीं रह गया है.जाहिर है कि सुप्रीमकोर्ट ने अपनी पिछली सुनवाई के दौरान आरबीआई और सरकार से पूछा था कि क्यों न 500 करोड़ के अधिक बैंक डिफाल्टरों के नाम सार्वजनिक कर दिए जाएँ.लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर और सख्ती दिखाते हुए सरकार और आरबीआई को इस मामले का निवारण ढूंढने को कहा है.कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि डिफाल्टरों से कर्ज वसूली के लिए क्या प्लान है ?माननीय कोर्ट से सरकार से यह भी पूछा है कि सरकार ने अभी तक इसके लिए क्या –क्या कदम उठायें हैं ? कोर्ट ने क...

वर्चस्व की लड़ाई में सपा खो रही राजनीतिक जमीन

     उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव जैसे –जैसे करीब आ रहें है सियासत हर रोज़ नए करवट लेती नजर आ रही है.हर रोज़ ऐसी खबरें सामने आ रहीं हैं जो प्रदेश की सियासत में बड़ा उलट फेर करने का माद्दा रखतीं है.सत्तारूढ़ दल समाजवादी पार्टी की आंतरिक कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, चुकी यहाँ मामला जटिल इसलिए भी हो जाता है कि एक तरफ पार्टी में दरार तो आ ही रही है वहीँ दूसरी तरफ मुलायम परिवार में बिखराव भी हो रहा है.इन दोनों को बिखरने से रोकने में अभी तक पार्टी व परिवार मुखिया मुलायम सिंह भी सफल नहीं हुए हैं. गत जून माह से ही चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश में बीच शुरू हुई तल्खी लागतार बढती जा रही है. अगर गौर करें तो चुनाव में अब ज्यादा समय शेष नहीं रह गया है सभी दल चुनावी बिसात बिछाने में लगें हुए ऐसे में सत्ताधारी दल समाजवादी पार्टी दो खेमे में बंटी हुई नजर आ रही  है.जिसकी बानगी हम कई बार पहले भी देख चुके हैं एक तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तो दूसरी तरफ शिवपाल यादव खड़ें हैं.ताज़ा मामला पोस्टर वार को लेकर सामने आया है आगामी तीन नवम्बर को जहाँ अखिलेश यादव “ रथ यात्रा” शुरू करने ज...